पर्यावरण संरक्षण किताबों का विषय नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार है। पौधारोपण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।
विद्यालय और महाविद्यालय में हम वर्षों तक पर्यावरण अध्ययन पढ़ते हैं। हमें बताया जाता है कि वृक्ष पृथ्वी के फेफड़े हैं, प्रकृति का संतुलन मानव जीवन का आधार है और पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। परीक्षा में हम इन विषयों पर अच्छे अंक भी प्राप्त कर लेते हैं। लेकिन एक प्रश्न हम सभी को स्वयं से पूछना चाहिए - क्या हमारी शिक्षा केवल उत्तर पुस्तिका तक सीमित रह गई है, या उसने हमारे व्यवहार में भी परिवर्तन किया है?
यदि हम शिक्षित होने के बाद भी प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझ पाए, तो हमें यह विचार करना होगा कि हमने वास्तव में सीखा क्या?
आज आधुनिक जीवनशैली में हम स्वयं को पहले से अधिक शिक्षित और जागरूक मानते हैं। लेकिन यदि हम अपने आसपास की हरियाली को बचाने, जल का संरक्षण करने और पौधारोपण जैसे छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी समय नहीं निकाल पा रहे हैं, तो हमारी शिक्षा का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
हमारे पूर्वजों के पास आज जैसी आधुनिक शिक्षा, तकनीक और संसाधन नहीं थे। फिर भी वे प्रकृति से प्रेम करते थे। वे वृक्ष लगाते थे, उनकी पूजा करते थे और उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित छोड़ जाते थे। उन्होंने प्रकृति का भक्षण नहीं, बल्कि संरक्षण किया। यही कारण है कि आज भी भारत की सांस्कृतिक परंपराओं में पीपल, बरगद, नीम, बेल, तुलसी और अनेक वृक्ष केवल वनस्पति नहीं, बल्कि जीवन का प्रतीक माने जाते हैं।
श्री उमिया कन्या महाविद्यालय का भी यही विश्वास है कि पर्यावरण संरक्षण भाषणों से नहीं, व्यवहार से प्रारंभ होता है। यही कारण है कि महाविद्यालय परिसर आज केवल भवनों का समूह नहीं, बल्कि एक विकसित हरित परिसर (Green Campus) के रूप में अपनी अलग पहचान रखता है।
महाविद्यालय परिसर में वर्तमान में 35 विभिन्न प्रजातियों के 713 वृक्ष, 8 प्रजातियों की 199 झाड़ियाँ (Shrubs) तथा 82 बेलें (Bael) विकसित की जा चुकी हैं। परिसर में 115 नीम, 68 अशोक, 40 मीठे नीम, 39 कटहल, 38 चीकू, 38 फॉक्सटेल पाम, 24 चंपा, 22 कनेर, 17 शहतूत, 14 आम, 14 सीताफल, 8 पीपल, 8 बेलपत्र, 4 बरगद, 4 जामुन, 3 कदंब, 3 चंदन सहित अनेक प्रकार के भारतीय एवं उपयोगी वृक्ष विद्यार्थियों को स्वच्छ वातावरण, प्राकृतिक छाया और जैव विविधता का जीवंत अनुभव प्रदान कर रहे हैं। परिसर में 100 गोल्डन बॉटलब्रश तथा 86 फाइकस रेटूसा जैसी सजावटी झाड़ियाँ भी हरियाली को समृद्ध बनाती हैं।
यह केवल आँकड़े नहीं हैं। यह इस बात का प्रमाण हैं कि यदि इच्छा और संकल्प हो तो एक शैक्षणिक परिसर भी पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायी उदाहरण बन सकता है।
इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए महाविद्यालय ने इस वर्ष 40 से अधिक औषधीय पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है। हमारा उद्देश्य केवल परिसर को और अधिक हराभरा बनाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है।
वर्तमान समय पौधारोपण के लिए सबसे उपयुक्त है। वर्षा ऋतु में लगाए गए पौधों के जीवित रहने की संभावना सबसे अधिक होती है। इसी उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान भी संचालित किया जा रहा है, जो प्रत्येक नागरिक को अपनी माँ के सम्मान और प्रकृति के संरक्षण के लिए कम से कम एक पौधा लगाने का संदेश देता है।
यदि आपके पास पर्याप्त भूमि नहीं है, तो भी चिंता की कोई आवश्यकता नहीं। आप अपने घर की छत, आँगन, बालकनी या एक साधारण गमले में भी पौधा लगा सकते हैं। जब वह पौधा विकसित हो जाए, तब उसे किसी बगीचे, विद्यालय, खेत या सार्वजनिक स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। पौधा लगाना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है उसकी नियमित देखभाल करना।
मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिनों में पुनः वर्षा होने की संभावना है। प्रकृति स्वयं हमें पौधारोपण का सर्वोत्तम अवसर दे रही है। आइए, इस अवसर को केवल सोशल मीडिया पोस्ट या औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि अपने जीवन का एक स्थायी संकल्प बनाएं।
आज हम सभी छात्राओं, अभिभावकों, पूर्व छात्राओं और नागरिकों से एक विनम्र आग्रह करते हैं - कम से कम एक पौधा अवश्य लगाइए। यह पौधा आपके घर के बाहर, खेत में, विद्यालय में, किसी सार्वजनिक स्थान पर या एक छोटे से गमले में भी हो सकता है। आने वाले वर्षों में वही पौधा किसी को छाया देगा, किसी पक्षी का आश्रय बनेगा, किसी बच्चे को स्वच्छ हवा देगा और शायद आपके इस छोटे-से प्रयास को आने वाली पीढ़ियाँ धन्यवाद के साथ याद करेंगी।
याद रखिए...
डिग्री आपको एक सफल व्यक्ति बना सकती है, लेकिन प्रकृति के प्रति आपका उत्तरदायित्व ही आपको एक जिम्मेदार नागरिक बनाता है।
इस वर्षा ऋतु में एक पौधा अवश्य लगाइए। यही आपकी शिक्षा का सबसे सुंदर और सबसे जीवंत प्रमाण होगा।
Editorial Desk
शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि उस ज्ञान को समाज, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के हित में व्यवहार में उतारना भी है। आइए, इस वर्षा ऋतु में पौधारोपण को अभियान नहीं, बल्कि अपना संस्कार बनाएँ।
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