जहाँ प्रतिशोध समाप्त होता है, वहीं से शांति आरंभ होती है।

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 🌿 भारतीय ज्ञान परंपरा | श्रृंखला – 02 🌿

एक बार भगवान बुद्ध के शिष्यों ने उनसे पूछा—

"भगवन! आपने कहा है कि किसी के साथ बैर नहीं करना चाहिए। यदि कोई हमारे साथ बैर करे, तो हमें उसका उत्तर कैसे देना चाहिए?"

तब भगवान बुद्ध ने कहा—

📖

न हि वेरेन वेरानि सम्मन्तीध कुदाचनं।
अवेरेन च सम्मन्ति, एस धम्मो सनन्तनो॥

अर्थात्—

"बैर को बैर से कभी समाप्त नहीं किया जा सकता। बैर का अंत केवल प्रेम, करुणा और सद्भाव से ही होता है। यही सनातन सत्य है।"

आज के समय में जब छोटी-छोटी बातों पर मनमुटाव और कटुता बढ़ जाती है, तब भगवान बुद्ध की यह शिक्षा हमें संयम, सहिष्णुता और प्रेम का मार्ग दिखाती है।

🌼 जहाँ प्रतिशोध समाप्त होता है, वहीं से शांति आरंभ होती है।

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🙏 श्री उमिया कन्या महाविद्यालय, रंगवासा (राऊ), इंदौर
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